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हिमाचल की मंजरी महाजन को राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित, 31 शिक्षकों को स्टेट टीचर अवार्ड; प्रिंसिपल वीरेंद्र चौहान के चयन पर बवाल

सुजानपुर की प्रिंसिपल मंजरी महाजन को नेशनल टीचर अवॉर्ड, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित

हिमाचल के 31 शिक्षकों का स्टेट टीचर अवॉर्ड के लिए चयन, राज्यपाल कविंद्र गुप्ता लोकभवन में देंगे पुरस्कार

डाइट शिमला के प्रिंसिपल वीरेंद्र चौहान के चयन पर सवाल, 11 शिक्षकों ने राज्यपाल से जांच की मांग की


शिमला। शिक्षक दिवस के मौके पर हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का एक बड़ा अवसर सामने आया है। हमीरपुर जिले के सुजानपुर सीबीएसई स्कूल की प्रिंसिपल मंजरी महाजन को उनके शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए आज नई दिल्ली में नेशनल टीचर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान करेंगी।

मंजरी महाजन का चयन केवल पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था में योगदान के आधार पर नहीं हुआ है, बल्कि उन्होंने स्कूल शिक्षा को पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी काम किया है। उनके नेतृत्व में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल परिसर को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

स्कूल में कचरा प्रबंधन, कचरे का सेग्रीगेशन, प्लास्टिक कलेक्शन और एकत्र किए गए प्लास्टिक को पंचायत के माध्यम से जमा करवाने जैसी व्यवस्थाओं पर काम किया गया। स्कूल परिसर को प्लास्टिक फ्री कैंपस बनाने की दिशा में भी प्रयास किए गए। इसके अलावा नई तकनीक के इस्तेमाल से पढ़ाई को बेहतर बनाने और स्कूल के सभी बच्चों की गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

इन्हीं प्रयासों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए मंजरी महाजन का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल की एक शिक्षिका को यह सम्मान मिलना प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

राज्य स्तर पर 31 शिक्षकों को मिलेगा सम्मान

राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ ही हिमाचल प्रदेश में स्टेट टीचर अवॉर्ड के लिए भी शिक्षकों का चयन किया गया है। दी गई विस्तृत जानकारी के अनुसार कुल 31 शिक्षक और प्रधानाचार्य इस प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय सम्मान के लिए चुने गए हैं। इन्हें शिमला स्थित लोकभवन में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता सम्मानित करेंगे।

पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के भी मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।

विभागवार चयन की बात करें तो स्कूल शिक्षा विभाग के 21 शिक्षक, उच्च शिक्षा विभाग के 5 शिक्षक एवं प्रिंसिपल तथा तकनीकी शिक्षा विभाग के 5 अध्यापक इस पुरस्कार के लिए चुने गए हैं। इन तीनों श्रेणियों की संख्या मिलाकर कुल 31 होती है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि पुरस्कार के लिए उन शिक्षकों का चयन किया गया है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई तथा उनके शैक्षणिक विकास में विशेष रुचि दिखाई है।

वीरेंद्र चौहान के चयन को लेकर उठे सवाल

राज्य शिक्षक पुरस्कार की घोषणा के बीच जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) शिमला के प्रिंसिपल वीरेंद्र चौहान के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ शिक्षकों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले की जांच की मांग की है।

राज्यपाल को भेजे गए पत्र में 11 शिक्षकों ने दावा किया है कि वीरेंद्र चौहान का नाम 29 अगस्त 2025 को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए शिक्षकों की सूची में शामिल नहीं था। शिक्षकों का आरोप है कि इसके बावजूद बाद में उनका नाम शिक्षक पुरस्कार के लिए जारी सूची में शामिल कर दिया गया।

इसको लेकर शिक्षकों ने चयन प्रक्रिया के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला किसी व्यक्तिगत शिक्षक के खिलाफ आपत्ति का नहीं है, बल्कि चयन प्रक्रिया, पात्रता और निर्धारित मानदंडों के समान रूप से पालन से जुड़ा हुआ है।

चयन प्रक्रिया पर निष्पक्ष जांच की मांग

राज्यपाल को भेजे गए पत्र में शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं बरती गईं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि निर्धारित पात्रता और श्रेणीवार मानदंड सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू किए गए या नहीं।

शिक्षकों की ओर से मांग की गई है कि शिक्षक पुरस्कार के लिए अपनाई गई पूरी चयन प्रक्रिया का रिकॉर्ड देखा जाए और यह जांच की जाए कि सभी उम्मीदवारों के लिए समान नियम और मापदंड लागू किए गए थे या नहीं।

शिक्षकों ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी आपत्ति पुरस्कार पाने वाले किसी शिक्षक की व्यक्तिगत योग्यता के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि उनका सवाल पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के समान अनुपालन को लेकर है।

विभाग का दावा, तय मापदंड के आधार पर हुआ चयन

वहीं शिक्षा विभाग का कहना है कि राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए निर्धारित मापदंड पूरा करने वाले शिक्षकों का ही चयन किया गया है। विभाग के अनुसार पुरस्कार का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले और विद्यार्थियों के प्रति विशेष समर्पण दिखाने वाले शिक्षकों को सम्मानित करना है।

ऐसे में एक तरफ राज्य के शिक्षकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किए जाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ चयन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने इस समारोह से पहले चर्चा बढ़ा दी है।

अब इस पूरे मामले में नजर इस बात पर रहेगी कि वीरेंद्र चौहान के चयन को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर क्या कार्रवाई होती है और शिक्षकों द्वारा मांगी गई चयन रिकॉर्ड की जांच होती है या नहीं।

फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर मंजरी महाजन को मिलने वाला सम्मान हिमाचल के शिक्षा जगत के लिए बड़ी उपलब्धि है। वहीं राज्य स्तर पर 31 शिक्षकों का सम्मान उन शिक्षकों के योगदान को पहचान देने का अवसर है, जिन्होंने विद्यार्थियों की शिक्षा और विकास के लिए काम किया है। दूसरी ओर चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों ने यह भी सामने ला दिया है कि ऐसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में पारदर्शिता और समान मानदंड को लेकर शिक्षकों की अपेक्षाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं।